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krishak samaj ki pramukh visheshta कृषक समाज की प्रमुख विशेषताएं

krishak samaj ki pramukh visheshta कृषक समाज की प्रमुख विशेषताएं   कृषक समाज की अवधारणा का अर्थ -                                                     कृषक समाज की संकल्पना को एक अवधारणा के रूप में सबसे पहले विकसित करने का श्रेय मेनटया राबर्ट रेडफील्ड को है।   में उन्होंने मेक्सिको देश के टेपोजलान (tepoztlon) नामक एक ग्राम में कृष्ण समुदाय का अध्ययन किया और एक आधुनिक मानवशास्त्रीय प्रविधि के अनुसार कृषक समुदाय की अवधारणा को प्रस्तुत किया। रेडफ़ील्ड ने 'कृषक' शब्द को इन शब्दों में प्रस्तुत किया है जैसे कि मेरा विचार है कृष्ण में उन लोगों का ही समावेश किया जाना चाहिए जो कम से कम इस बात में समान है कि कृषि उनकी आजीविका का साधन और जीवन विघि है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कृषक उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसे किसी भी भूखंड का स्वामित्व प्राप्त होता है और उस भूमि से उसका नाम भावनात्मक लगाव होता है हम कृषक समाज की अवधारणा का अर्थ स्पष्ट करेंगे। परिभाषाए...

थर्स्टीन वेबलनी के ' दृष्टि आर्कषण उपभोग के नियम tharstin vebalni ke Drashti akarshan upbhog ke niyam

  थर्स्टीन वेबलनी के   '   दृष्टि    आर्कषण उपभोग के नियम    '               '  दृष्टि   आर्कषण उपभोग   के नियम    '            यह नियम उस   पद्धति की   ओर संकेत करता है।   जिसके अनुसार   धनी   विलासी-वर्ग दूसरों को दिखाने के लिए अपने धन की आवश्यकता से अधिक खर्च करते हैं।   इस प्रकार का खर्च धन अपव्यय या बर्बादी ही होता है। कुछ भी हो , धनी विलासी-वर्ग अपने धन का प्रदर्शन भोजन , पोशाक  , निवास स्थान ,  फर्नीचर आदि पर अधिकाधिक व्यय और उनके आवश्यक उपभोग के दूब करते हैं।   इस प्रकार का उपभोग दूसरों की   दृष्टि   को आकर्षित करता है और उसका परिणाम यह होता है कि दूसरों की निगाहों में इस प्रकार का उपभोग करने वालों की प्रतिष्ठा बढ़ जाती है।   दृष्टि  – आकर्षक उपभोग का एक प्रधान   उद्देश्य   अपने सम्मान को बढ़ाना होता है।   मनमानी वस्तुओं का उपभोग स्वयं ही सम्मान ...

भारतीय ग्रामीण समुदाय की विशेषताएं bhartiya gramin samuday ki visheshta

भारतीय ग्रामीण समुदाय की विशेषताएं bhartiya gramin samuday ki visheshta प्रत्येक समाज का निर्माण विभिन्न इकाइयों के योग से होता है। यह इकाइयां एक दूसरे से संबंधित होती है। समाज के व्यवहार संबंधी प्रति मनुष्य की समझ के लिए इस इकाइयों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक होता है। भारत ग्रमो का देश है, जहां प्रत्येक गांव की पहली भौगोलिक, परिस्थितियाँ हैं। यहां संरचना की दृष्टि से अधिक कई प्रकार के गांव पाए जाते हैं, जिनकी नैतिक पृष्ठभूमि, भाषा, विचार व व्यवहार की पद्धति भी एक दूसरे से भिन्न होती है। भारतीय ग्रामों के ढांचे को समझने के लिए उन इकाइयों का विवेचन आवश्यक है जिनके आधार पर ग्रामीण समाज व्यवस्थित है।   भारतीय ग्रामीण समुदाय की विशेषताएं   भारत ग्रामो का देश है जिसके अधिकांश जनसंख्या गांव में निवास करते हैं।   विशेषताएं -     1. संयुक्त परिवार -  संयुक्त परिवारों में यहां पति- पत्नी व बच्चों के परिवार की तुलना में ऐसे परिवार अधिक पाए जाते हैं। जिनमें तीन या अधिक पीढ़ियो के सदस्य एक  स्थान पर रहते हैं। इनका भोजन संपत्ति और पूजा- पाठ का साथ साथ हो...

आत्महत्या का सिद्धांत aatmhatya ka sidhant

दुर्खीम का आत्महत्या का सिद्धांत aatmhatya ka sidhant     आत्महत्या के सिद्धांत के प्रतिपादक में दुर्खीम का स्थान सर्वोपरि है इसका कारण यह है कि दुर्खीम ने आत्महत्या के सिद्धांत का प्रतिपादक सामाजिक परिवेश में किया है।  दुर्खीम पहला समाजशास्त्री है, जिसने आत्महत्या के सिद्धांतो  का प्रतिपादन समाजशास्त्री संदर्भ में किया है।  दुर्खीम में अपनी "The suicide" पुस्तक में किया है। इस पुस्तक का प्रकाशन 1897 में हुआ था।    परिभाषा दुर्खीम -    आत्महत्या अपनी इच्छा से जानबूझकर आत्महनन की क्रिया है।   दुुर्खीम के आत्महत्या का सिद्धांत का निष्कर्ष -     1. आत्महत्या की संख्या जनसंख्या की दृष्टि से प्रतिवर्ष लगभग एक समान रहती है।  2. आत्महत्याएं सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों में अधिक होती है।  3. आत्महत्याएं स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषो द्वारा अधिक होती है। 4 . जहां तक आयु का संबंध है कम आयु में आत्महत्याएं कम होती है और अधिक आयु में अधिक होती हैं।  5. ग्रामीण जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या की तुलना में आत्महत्या की दर निम्न...

jaatiwad ka arth Paribhasha or visheshataye जातिवाद का अर्थ परिभाषा और विशेषताएं

jaatiwad ka arth Paribhasha or visheshataye  जातिवाद का अर्थ परिभाषा और विशेषताएं जातीवाद का अर्थ -   जातिवाद जाति प्रथा से ही संबंधित एक गंभीर समस्या है हर जाति में संगठन पाए जाते हैं जिसका कार्य अपनी जाति को सुविधा प्रदान करना है और जाति के हितों की रक्षा करना है और अन्य जाति के हितों की अनदेखी करने लगते हैं और अपनी हैं। ही जाति के सदस्यों को उच्च स्थानो पर प्रगतिशीलत करने का प्रयास करते हैं और पदों में भी अपनी ही जाति के लोगों को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने का प्रयत्न करे तो इसे हम जातिवाद कहेगे।  अत: स्पष्ट है कि जातिवाद अपनी जाति के प्रति घनिष्ठता की भावना है जिसके आधार पर जाति का उत्थान किया जाता है अत: स्पष्ट है कि जातिवाद अपनी जाति के प्रति घनिष्ठता की भावना है जिसके आधार पर जाति का उत्थान किया जाता हैं     जातिवाद की परिभाषा -   1. काका कालेलकर के अनुसार - "जातिवाद एक अबाधित अंध और सर्वोच्च समूह भक्ति है जो कि न्याय, ओचित्य, समानता और विश्व बंधुत्व की उपेक्षा करता है।" जातिवाद की विशेषताएं     1. भावनाओं का केंद्रीकरण - जात...

Dahej nirodhak adhiniyam 1961 दहेज निरोधक अधिनियम 1961

 Dahej nirodhak adhiniyam 1961 दहेज निरोधक अधिनियम 1961    अर्थ - हमारे समाज की वैवाहिक समस्याओं में दहेज प्रथा की समस्या का रूप भी बहुत गंभीर है।                     दहेज निरोधक अधिनियम 1961  इस समय के समाधन हेतु 8 मई,1961को संसद के संयुक्त      अधिवेशन में निरोधक बिल' रखा गया। इस अधिनियम की भाषा तथा उद्देश्य ऐसे हैं जो हिंदुओं एवं दूसरे सभी संप्रदायों पर लागू होते हैं इसके द्वारा लड़के अथवा लड़की के विवाह को स्वीकृति के रूप में सभी तरह के दहेज लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। विशेषताएं -    1. " विवाह के पहले या बाद में विवाह की एक शर्ट के रूप में एक पक्षीय व्यक्ति द्वारा दूसरे पक्ष की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दी गई कोई भी संपत्ति अमूल्य वस्तु रहे कहीं जाएगी।"   2.  विवाह के अवसर पर भेंट के रूप में दी जाने वाली नकद, रकम, आभूषण, वस्त्र अथवा अन्य वस्तुओं के को 'दहेज' नहीं माना जाएगा।   3. अगर कोई व्यक्ति दहेज देता अथवा लेता है या इस कार्य में मदद करता...

समिति का अर्थ परिभाषा और विशेषताएं samiti ka arth paribhasha or visheshta

  समिति का अर्थ परिभाष और विशेषताएं     समिति का अर्थ (Association) - जहां केवल एक ही आवश्यकता की पूर्ति होती है उसे समिति कहते हैं।                        परिभाषाएं -  1. मैकाइवर एवं पेज -                                 समिति मनुष्यों का एक समूह है जिसे किसी सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए संघटित किया जाता है।  2. बोगर्डस  -  सामान्यत: किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मिलकर कार्य करना समिति है । विशेषताएं -  1.  मनुष्य व्यक्तियों का समूह है -                                                 समिति तब बनती है, जब कि जबकि अनेक व्यक्ति मिलकर किसी हित की प्राप्ति के लिए परस्पर संगठित होना आवश्यक मानते हैं। इस उद्देश्य से प्रेरित होकर जिस समूह का वे निर्माण करते है, उसे समिति कहते...